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                                                                                अध्यक्ष संदेश

 

‘हरियाणा में पिछले कुछ दशकों के दौरान रसायनों पर आधारित खेती के कारण खाद्यान्न उत्पादन में बहुत प्रगति हुई है। तथापि, इस सफलता के परिणामस्वरूप कई समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं। राज्य में लगभग 58 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र में चावल-गेहूं प्रणाली अपनाई जाती है जिसे अब मिट्टी की दशा खराब होने का एक प्रमुख कारण माना गया है। अतः राज्य में कृषि अनुसंधान एवं विकास के लिए टिकाऊ खेती के अन्य विकल्पों पर ध्यान देना होगा। वर्तमान में, टिकाऊ कृषि और संबंधित क्षेत्रों के लिए हमें जलवायु के प्रति अनुकूल खेती की तकनीकों को अपनाकर, प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण में सहायता पहुंचाकर और खेती को अधिक टिकाऊ व लाभदायक बनाने के लिए उसकी लागत को कम करने और जोखिम प्रबंधन जैसे उपाय अपनाकर इस स्थिति में संतुलन लाने की आवश्यकता है। अब भी ऐसे अनेक अवसर उपलब्ध हैं जिनका अभी तक पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाया है और जिनसे न केवल खेती में फायदे को बढ़ाने में मदद मिलेगी बल्कि बागवानी, सब्जियों की खेती, खुम्बी की खेती, जैविक खेती, डेरी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, कुक्कुटपालन, कटाई उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन तथा कृषि उद्योग सहित परिनगरीय खेती में फार्म से होने वाली आमदनी को बढ़ाने की बहुत संभावनाएं हैं। आलू, प्याज, टमाटर, मटर, खीरा-ककड़ी आदि जैसी सब्जियों की जैविक खेती की विधियां अपनाते हुए परिनगरीय खेती करने से किसानों को अधिक फायदा होने की उम्मीद है। इससे चावल-गेहूं प्रणाली की तुलना में लाभ-लागत अनुपात बढ़ेगा। जैविक खेती के लिए उपयुक्त किस्मों के विकास हेतु अनुसंधान को बढ़ावा देना और परिनगरीय खेती को अपनाना आधुनिक युग की मांग है। इसके अलावा कृषि शिक्षा से अभिप्रेरित उद्यमशीलता के विकास तथा स्वरोजगार के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं की क्षमता के निर्माण करने की भी बहुत संभावना है। घरेलू तथा वैश्विक बाजार में कृषि व्यापार और उद्यमशीलता के लिए अवसर उभर रहे हैं जिनसे प्रौद्योगिकी आधारित कृषि और फसलों की कटाई उपरांत प्रबंधन के माध्यम से रोजगार सृजित हो रहे हैं। हरियाणा की भौगोलिक स्थिति इसे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंडियों में पहुंचने का अनोखा अवसर प्रदान करती है। इसलिए युवाओं को खेती तथा संबंधित क्षेत्रों में बनाए रखने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। तथापि, अधिक आमदनी लेने के लिए प्रसंस्करण तथा कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन हेतु उचित और आकर्षक नीति की आवश्यकता है। इससे किसानों को बेहतर लाभ सुनिश्चित होगा, फसलों की कटाई के बाद होने वाली हानियां कम होंगी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के माध्यम से रोजगार पैदा होंगे तथा बुनियादी ढांचे की सुविधाओं के सृजन में और अधिक निवेश के माध्यम से उत्पादों के विपणन व उनकी बिक्री में सुविधा होगी। ऐसे विशेष रूप से अनुकूल मुख्य केन्द्र सृजित करने की आवश्यकता है जिनमें राज्य के जलवायु वाले क्षेत्रों के अनुसार न केवल उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध हों, बल्कि जहां से उत्पादों का निर्यात भी किया जा सके। इसके अलावा कृषि आधारित उत्पादों का ब्राण्डकरण भी शुरू किया जाना चाहिए और इस दिशा में विशेष रूप से युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ब्राण्ड युक्त उत्पादों के विकास के लिए प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकती हैं। अनुसंधान संस्थानों का यह उद्देश्य होना चाहिए कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ऐसे अनोखे उत्पाद सृजित कर सकें जिन्हें युवा शीघ्रातिशीघ्र अपना लें या उद्यमी कृषि के रूप में आजीविका के लिए उनसे आमदनी ले सकें और आगे चलकर राज्य की अर्थव्यवस्था और समृद्धि में अपना योगदान दे सकें। । वास्तव में, कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन - 2017 कृषि को ग्रामीण युवाओं के लिए और अधिक आकर्षक व लाभदायक बनाने में सहायक सिद्ध हुआ। सरकार ने ‘कृषि में युवाओं के सशक्तीकरण’ पर विशेष बल दिया है जिससे न केवल कृषि में अधिक वृद्धि लाने में सहायता मिलेगी बल्कि कृषि और इससे सम्बंधित उद्यमों से अधिक आमदनी हो सकेगी। हरियाणा सरकार के प्रयास निश्चित रूप से ऐसा वातावरण निर्माण करने और बुनियादी ढांचा तैयार करने में सफल होगा जिसमें ‘उत्तम खेती मध्यम बान..’ कहावत को ध्यान में रख कर दोनों ही महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियां युवाओं के हाथों मे हो तथा राज्य और राष्ट्र, दोनों का कल्याण हो - यही कामना।

डॉ रमेश कुमार यादव

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वृक्षारोपन महोत्सव 7 सितंबर को शाम 5.00 बजे कार्यालय परिसर में आयोजित किया गया।.
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जागरूकता अभियान में आयोजित कार्यक्रम में सादर आमंत्रित है। new
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"कृषि विविधिकरण - किसानों से सीधा संवाद" पर जिला स्तर के किसानों की बैठक एस. डी. कॉलेज, जी टी रोड, पानीपत में 27 जून, 2017 को प्रात: 10:00 बजे आयोजित की जायेग़ी।

आयोग की पंद्रहवीं बैठक आयोग कार्यालय, अनाज मंडी, सेक्टर 20, पंचकूला में आयोजित की गई।

हरियाणा की कृषि व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण नीति पर हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ बैठक 1 जून, 2017 को सम्मेलन हॉल, किसान भवन, सेक्टर -14, पंचकुला में 10:30 बजे आयोजित की जाएगी।



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