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                                                                                अध्यक्ष संदेश

 

हरियाणा तथा इसके आस-पास के राज्यों के चावल-गेहूं फसल प्रणाली को अपनाने वाले अंचलों में जिन खेतों में कम्बाइन से कटाई की गई है, वहां के किसानों द्वारा अगली फसल की समय पर बुवाई करने की जल्दी के कारण लाखों टन पराली जलाई जाती है। इसके धुएं/कुहासे के परिणामस्वरूप पर्यावरण का प्रदूषण और वैश्विक ऊष्मन होता है। इसलिए पृथ्वी मां के पर्यावरण को बचाने और जीवन का टिकाऊ बनाने के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण के निर्देशों के अनुसार हरियाणा सरकार ने पराली को जलाना एक गैर-कानूनी कार्य घोषित किया है। पराली को यंत्रों से साफ करने तथा उनके गट्ठर बनाकर उन्हें इधर-उधर ले जाने व बिजली पैदा करने, ईंटे पकाने, नाजुक सामान जैसे क्रॉकरी और कांच के पात्रों को पैक करने के उद्योगों तथा पशु चारे और आहार के रूप में उपयोग करने की तकनीकें/यंत्र उपलब्ध हैं। एक अन्य प्रभावी प्रौद्योगिकी भी है जिससे पराली के छोटे-छोटे टुकड़े करके उसके भूसे को खेतों में समान रूप से बिखेर दिया जाता है तथा हैप्पी सीडर का उपयोग करते हुए अगली फसल की बुवाई तक इसे खेत की मिट्टी में मिला दिया जाता है। ऐसा चावल-गेहूं खेती प्रणाली के अंतर्गत किया जा सकता है। इसके अलावा फसल अवशेष को छोटे टुकड़ों में काटने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उसे खेत की मिट्टी में मिलाने के लिए भी यंत्र उपलब्ध हैं। इससे फसल पोषक स्रोतों की बचत होती है, प्रत्येक बूंद से अधिक फसल के लिए मिट्टी में नमी का संरक्षण होता है, कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आती है, खेत में खरपतवार कम पनपते हैं तथा बेहतर और गहरी जड़ों के कारण फसलों के पौधे भी हस्ट-पुष्ट होते हैं। तथापि, अधिकांश ऐसे यंत्र महंगे हैं और हरियाणा के अधिकांश किसानों की पहुंच से बाहर हैं। अतः इन यंत्रों को नाममात्र के प्रभार पर किराए पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। फसलों में पलवार के रूप में इस्तेमाल करने के अलावा इस भूसे का उपयोग खुम्बी उगाने के लिए बिछावन तथा पशु फार्मों में भी किया जा सकता है। बासमती धान का भूसा पोषक तत्वों से भरपूर चारा है और इसे पशु आहार में अन्य शुष्क या हरे चारों के साथ मिलाया जा सकता है। एक अन्य स्वःस्थाने जैविक युक्ति ‘कचरे का विघटन’ है जो यदि खेतों में सिंचाई के जल के साथ शुष्क जैव मात्रा के आधार पर पूर्व फसल की कटाई के बाद मिलाया जाए और अपशिष्ट को ट्रैक्टर से चलने वाले हलों की सहायता से खेत में जोतकर मिला दिया जाए तो यह बहुत प्रभावी सिद्ध होता है। इसके अलावा भविष्य में हमें उच्च मूल्य वाली फसलें जैसे सब्ज्यिं, फल, तिलहनी व दलहनी फसलें, मक्का आदि उगाकर धान की खेती वाले क्षेत्र को कम करना होगा ताकि पानी और ऊर्जा की बचत हो सके। इसके साथ ही फसल अवशेषों का प्रबंध करने के लिए कृषि एवं ग्रामीण विकास हेतु राष्ट्रीय बैंक से हरित जलवायु निधि से धनराशि प्राप्त की जा सकती है। वर्ष 2017-18 के दौरान कृषि मंत्रालय ने अवशेष प्रबंध के यंत्रों और उपकरणों जैसे धान के भूसे के गट्ठर बनाने, भूसे को काटने, उसके छोटे-छोटे टुकड़े करने, भूसे की पलवार तैयार करने, गायरो रेक, रोटावेटर, हैप्पी सीडर, शून्य जुताई व बुवाई यंत्र आदि उपलब्ध कराने के लिए 45 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की है। यह राशि खरीद के लिए 50 प्रतिशत अनुदान के साथ और किराए पर लेने की सेवा का केन्द्र स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत अनुदान के साथ फार्म मशीनरी बैंकों या यंत्र किराए पर देने वाले केन्द्रों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध हो सकती है। इसके साथ ही किसानों के खेतों पर उपरोक्त यंत्रों के प्रदर्शन के लिए 4000/-रु. प्रति हैक्टर की दर से भी अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार, अब इस समस्या का तकनीकी व वित्तीय हल किसानों के लिए उपलब्ध है जिससे वे इस गंभीर समस्या को और अधिक आमदनी लेने के अवसर में परिवर्तित कर सकते हैं तथा इस प्रकार फसल के अवशेषों को जलाने की इस बुराई को दूर कर सकते हैं।

डॉ रमेश कुमार यादव

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हरियाणा में परिनगरीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण पर कार्यशाला का आयोजन 14 सितंबर, 2018 को 02:30 P.M. समिति कक्ष, नेचर कैंप, थापली, मोरनी हिल्स, पंचकुला में किया जाएगा।

हरियाणा में कृषि-व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का प्रवर्धन के कार्यदल की बैठक 13 सितंबर, 2018 को 11:30 A.M. सम्मेलन हॉल, यादवेंद्र गार्डन,पिंजौर, हरियाणा में किया जाएगा।

हरियाणा में पराली प्रबंधन का प्रवर्धन कार्यदल की बैठक 8 अगस्त, 2018 को 11:30 बजे अध्यक्ष कार्यालय, हरियाणा किसान आयोग, पंचकुला में आयोजित की गई।

हरियाणा में कृषि-व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का प्रवर्धन के कार्यदल की बैठक 26 जुलाई, 2018 को 11:30 बजे, अध्यक्ष कार्यालय, पंचकूला में आयोजित की गई।

हरियाणा में परिनगरीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण पर कार्यशाला का आयोजन 18 जुलाई, 2018 को मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय, सीसीएस एचएयू, हिसार में आयोजित की गई।

हरियाणा में दुधारू गोपशुओं और भैंसों से संबंधित पशु पोषण पर कार्यदल की बैठक 25 जून, 2018 को सुबह 10:30 बजे आयोजित की गई।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 20 जून, 2018 को 10:00 बजे सम्मेलन हॉल, अरोमा होटल, फतेहाबाद में 20 जून, 2018 को 10:00 बजे आयोजित की गई।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 18 जून, 2018 को 10:00 बजे skylark, पर्यटक रिज़ॉर्ट, मिनी सचिवालय के सामने, पानीपत में आयोजित की गई।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 18 जून, 2018 को 10:00 बजे Dabchick, पर्यटक रिज़ॉर्ट, दिल्ली आगरा रोड, होडल में में आयोजित की गई।

"हरियाणा में परिनगरीय कृषि पर कार्यदल" की बैठक 15 जून, 2018 को दोपहर 2:00 बजे हरियाणा किसान अयोग,पंचकूला के कार्यालय में आयोजित की गई ।

"हरियाणा में जैविक खेती के संवर्धन" पर कार्यदल" की बैठक 13 जून, 2018 को सुबह 10:30 बजे सीसीएस एचएयू, हिसार में आयोजित की गई।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक सुरखब पर्यटक रिज़ॉर्ट, एनएच -10, सिरसा में 11 जून, 2018 को 10:00 बजे आयोजित की गई।

"पोपलर की खेती - बाधाएं एवं नीति निर्धारण" पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रेड बिशप हरियाणा पर्यटक परिसर, सेक्टर 1, पंचकूला में 8 जून, 2018 को की गई।



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