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                                                                                अध्यक्ष संदेश

 

मकर संक्रांति के उपरांत से प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं और सूर्योदय का समय बढ़ने लगता है जिससे यह संकेत मिलता है कि हम अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं। परिवर्तन के इस युग में हमारे राज्य की कृषि में भी सकारात्मक परिवर्तन हो रहे हैं तथा सरकार द्वारा किसानों के लिए अनेक अनुकूल नीतियां तैयार की जा रही हैं। यह कृषि के रूपांतरण की अवस्था है, जिसमें कृषि के क्षेत्र में उद्यमशीलता के विकास और रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया है ताकि किसानों का अधिक से अधिक कल्याण हो। हमारे किसान अब क्रांति के पथ पर अग्रसर हैं तथा नवीनतम तकनीकें, उच्च मूल्य वाली खेती, मूल्यवर्धन, ब्राण्डकरण, पैकेजिंग और विपणन को अपनाकर खेती को अधिक से अधिक आकर्षक बना रहे हैं। तथापि, इस प्रगति को टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे कुछ पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दें जैसे पर्यावरण प्रदूषण, मिट्टी का स्वास्थ्य, भूजल की गुणवत्ता, गिरता हुआ जल-स्तर और इन सबसे बढ़कर पराली का प्रबंध बहुत महत्वपूर्ण है। भूसे को जलाना एक सक्षम के समान उभर रही है जिससे न केवल मानव स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है बल्कि हमारे सुन्दर ग्रह ‘पृथ्वी मां’ पर प्रत्येक का जीवन प्रभावित हो रहा है और पर्यावरण में भी गिरावट आती जा रही है। अतः हम सभी का यह आह्वान है कि संरक्षण कृषि की विधियों के माध्यम से फसल अवशेष उचित का प्रबंध किया जाए। यह न केवल फसल उत्पादकता सुधारने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों का स्तर बना रहता है और उसमें सुधार होता है। इन विधियों से खेती की लागत में भी कमी आती है क्योंकि ऐसा करने पर जुताई संबंधी कार्य कम करने पड़ते हैं और इस प्रकार, ईंधन तथा श्रम की बचत होती है। किसानों को पराली के उचित प्रबंध के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। शून्य जुताई बीज ड्रिल, हैप्पी सीडर, स्ट्रा बेलर, रोटावेटर, धान के पुआल की पलवार, गायरो रेक, भूसा कटाई यंत्र, शैडर आदि किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं और ये किराए पर भी ‘कस्टम हायरिंग सेन्टर’ से लिए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त उद्यमियों और किसानों को भूसे के अन्य उपयोगों के बारे में भी अवगत कराना होगा जैसे भूसे से जैव ईंधन का उत्पादन, पशुओं के लिए शैय्या तैयार करना, चारे के रूप में इस्तेमाल करना, छाया के लिए छप्पर तैयार करना, टोकरियां बनाना, ईंट के भट्टों पर उपयोग करना व बायो गैस तैयार करना। इन सभी उपायों से किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। राज्य सरकार ने इस दिशा में पहल की है तथा उन किसानों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है जो अपनी पराली नहीं चलाएंगे। राज्य के किसान भी सरकारी नीतियों के समर्थन में आगे आ रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप इस मौसम में भूसे के जलाने की घटनाओं में कमी देखी गई है जो उत्साहजनक है। कुछ ग्राम पंचायतों ने किसानों के समक्ष यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि वे अपने खेतों में धान के भूसे को न जलाएं। अनुसंधान की अगली दिशा मिट्टी और पानी के प्रबंध के लिए कारगर तकनीकें विकसित करना तथा विविधीकृत कृषि के अंतर्गत और अधिक लाभदायक खेती के लिए पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता को बढाना है। इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों के सूक्ष्म प्रबंध के लिए सस्ती तकनीकें विकसित करनी होंगी और ब्लाॅक स्तर पर कृषि में समेकित पोषक तत्व प्रबंध को अपनाना होगा, ताकि इनका अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोग ताजी जिंसों के लिए हरियाणा की ओर देख रहे हैं क्योंकि हरियाणा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट है तथा इसके आस-पास अनेक अन्य महानगर भी हैं। ऐसा ठोस बुनियादी ढांचे से सुनिश्चित किया जा सकता है

डॉ रमेश कुमार यादव

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किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 24 मई, 2018 को 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल, ग्रे पेलिकन, हरियाणा पर्यटन, रेलवे स्टेशन के पास, यमुनानगर में आयोजित की जाएगी ।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 18 मई, 2018 को 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल, हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान, जींद में आयोजित की जाएगी ।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 14 मई, 2018 को 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल, एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र, रामनगर, कुरुक्षेत्र में आयोजित की जाएगी ।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 14 मई, 2018 को 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल, बार्बेट टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स, हरियाणा टूरिज्म, रेवाड़ी रोड, सोहना में आयोजित की जाएगी ।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 11 मई, 2018 को 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल,सेक्टर 14, पंचकुला में आयोजित की जाएगी ।

किसानों के साथ जिला स्तरीय बैठक 11 मई, 2018 को 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल,किंग फिशर, अंबाला में आयोजित की जाएगी ।

किसान गोष्ठी 24 मार्च, 2018 को 2:30 -4 :30 अपराह्न मेला ग्राउंड, रोहतक में आयोजित की जाएगी।

हरियाणा के परिनगरीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण पर कार्यदल की पहली बैठक 26 मार्च, 2018 को संकाय हाउस, एमडीयू, रोहतक में 3:30 अपराह्न में आयोजित की जाएगी।

3rd तृतीय कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन - 2018 मेला ग्राउंड, रोहतक, हरियाणा में 24-26 मार्च, 2018 को आयोजित किया जाएगा।

"हरियाणा में मशरूम खेती को बढ़ावा" पर कार्यदल की बैठक HAIC अनुसंधान एवं विकास केंद्र, मुरथल सोनीपत, हरियाणा के कार्यालय में 10 मार्च 2018 को 10:30 पूर्वाह्न पर आयोजित की जाएगी।

आयोग की सत्रहवी (एमर्जेंट)बैठक 21 फरवरी, 2018 को प्रधान सचिव हरियाणा सरकार , कृषि और किसान कल्याण विभाग , सचिवालय, चंडीगढ़ कार्यालय में आयोजित की गई।

हरियाणा में मशरूम की खेती पर कार्यदल की बैठक 29 जनवरी, 2018 को 11:00 A.M. अध्यक्ष के कार्यालय में आयोजित की जाएगी।

आयोग की बैठक 10 जनवरी, 2018 को आयोग कार्यालय, पंचकुला में आयोजित की गई ।

कुक्कुट किसानों के साथ बैठक 8 जनवरी, 2018 को किसान भवन, पंचकुला में आयोजित की गई।



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