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                                                                                अध्यक्ष संदेश

 

देश की निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए गहन फसलोत्पादन सुनिश्चित करने हेतू भारतीय कृषि में टिकाऊपन लाना आवश्यक है जिसके लिए सिंचाई जल की पर्याप्त आवश्यकता है। हमारे, पानी के संसाधन तेजी से कम होते जा रहे हैं इसलिए भविष्य में यथासंभव पानी की उपलब्धता हेतु इसकी बचत करना जरूरी है। अतः प्रत्येक बूंद से अधिक फसल उत्पन्न करने के लिए सूक्ष्म, ड्रिप, छिड़काव तथा कूंड़ सिंचाई प्रणालियों को फसल वृद्धि की नाजुक अवस्थाओं में सींचना, पलवार का उपयोग, पाला-गड्ढ़ा विधि अपनाना या विशेषज्ञतापूर्ण रोपण आदि जैसी जल बचाने की विधियों को तत्काल अपनाने की जरूरत है। इससे प्रति घन मी. जल उपयोग की दक्षता विभिन्न खेती प्रणालियों के अंतर्गत 1.5 से 2.5 गुणा बढ़ सकती है। ऐसी प्रणालियों को किसानों के खेतों में अपनाना अति आवश्यक है। मिट्टी के उपजाऊपन का प्रबंध करने व उसका संरक्षण करने के लिए खेती की अच्छी विधियों को अपनाना; भूमि, जल व पर्यावरण अपघटन में कमी लाना; सिंचाई का अनुसूचीकरण तथा वर्षा जल का संग्रहण, उपचारित मल-जल का पुनः उपयोग करना, जल प्रवहन प्रणालियों में होने वाले पानी के नुकसान को नियंत्रित करना तथा जल उपयोग की दक्षता को बढ़ाने के लिए अन्य उपाय अपनाना अब बहुत आवश्यक हो गया है। जल का रिसाव तथा उसका भूमि में बेकार चले जाना; मृदा की गहराई और बनावट; खुले खेतों से वाष्पन, जल संसाधन, फसलों से प्रवहन-वाष्पोत्सर्जन; सिंचाई संरचनाओं की डिज़ाइन; मौसम, जलवायु तथा वर्षा के प्रभावी पैटर्न, जल उपयोग की विधियां तथा इसका प्रवाह, सिंचाई क्षेत्र का आकार, इसका समतलीकरण तथा इससे संबंधित घटक व फसल के प्रकार, फसल पौधों की खेत में संख्या तथा अन्य दशाएं आदिकुछ ऐसे अन्य महत्वपूर्ण कारक हैं जो जल उपयोग की दक्षता को प्रभावित करते हैं। पानी के उपयोग की विभिन्न विधियों में से व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली खाला तकनीक या बाढ़ सिंचाई के कारण 50 प्रतिशत से अधिक जल की हानि होती है। इसके अलावा हमारे सिंचाई जालतंत्र की दक्षता भी हमारे देश की अधिकांश कृषि संबंधी योजनाओं में मात्र 60-75 प्रतिशत ही है। आवश्यकता से अधिक सिंचाई, उचित जलनिकासी नेटवर्क रहित सिंचाई से भूमिगत जल का तल स्तर ऊपर उठ जाता है जिससे मिट्टी में लवणता बढ़ती है और कृषि उत्पादकता कम हो जाती है। नहर कमांन क्षेत्र के अंतर्गत जलमग्न तथा मृदा लवणता जैसी दशाएं हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में अब निरंतर बढ़ रही हैं। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हमारे राज्य के किसानों को सिंचाई की नवीनतम तकनीकें जैसे ड्रिप तथा सूक्ष्म स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई करके और अधिक फसलें उगाने व मिट्टी को अपघटन से बचाने के लिए मुख्यतः पानी की बचत की जा सके। हरियाणा सरकार भी पाइपों-उपकरणों तथा तालाब निर्माण के लिए छोटे किसानों को 50-80 प्रतिशत तक अनुदान सहायता उपलब्ध करा रही है। यह सहायता छोटे किसानों के साथ-साथ बड़े सामुदायिक जल भंडारण तालाबों के लिए भी दी जा रही है। ड्रिप सिंचाई से सभी फसलों में प्रभावी ढंग से सिंचाई की जा सकती है और इससे जल उपयोग की दक्षता में 70 से 90 प्रतिशत तक सुधार होता है और चावल-गेहूं फसल प्रणाली में पानी की कम से कम 25-30 प्रतिशत बचत होती है। यह जल प्रयोग करने की सबसे प्रभावी विधि है जिससे पोषक तत्व भी सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुंचते हैं। इस विधि से फसलों की उपज बढ़ती है क्योंकि उर्वरक तथा सूक्ष्म पोषक तत्व खेत के सभी भागों में समान रूप से वितरित होते हैं। इसके अतिरिक्त लाभ यह भी है कि असमतल और उबड़-खाबड़ भूमि में भी जल समान रूप से वितरित होता है, खरपतवारों का प्रकोप कम होता है और रोगों में भी कमी आती है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए हमें इस धरती मां पर मुल्यवान पानी की बचत करने के लिए गहन प्रयास करने चाहिए।

डॉ रमेश कुमार यादव

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पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं की राज्य स्तरीय किसान बैठक 30 जनवरी, 2019 को सुबह 11:00 बजे हरियाणा पंचायत भवन, सेक्टर 28, मध्य मार्ग, चंडीगढ़ में आयोजित की गई।

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हरियाणा में कृषि-व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का प्रवर्धन कार्यदल की बैठक 15 जनवरी, 2019 को पंचकूला में आयोजित की गई।

"हरियाणा में मशरूम संवर्धन को बढ़ावा देने" पर कार्यदल की बैठक 10 जनवरी, 2019 को 10:00 बजे रेड बिशप,हरियाणा पर्यटन,पंचकुला में आयोजित की गई।

"हरियाणा में जैविक खेती को बढ़ावा देने" पर कार्यदल की बैठक 3 जनवरी, 2019 को प्रातः 11:00 बजे मैगपाई पर्यटक परिसर, सेक्टर 16 ए, फरीदाबाद में आयोजित की गई।

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हरियाणा में कृषि-व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का प्रवर्धन के कार्यदल की बैठक 26 अक्टूबर, 2018 को सीसीएस एचएयू, हिसार में आयोजित की गई।

हरियाणा में परिनगरीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण पर कार्यशाला का आयोजन 14 सितंबर, 2018 को 02:30 P.M. समिति कक्ष, नेचर कैंप, थापली, मोरनी हिल्स, पंचकुला में आयोजित की गई।





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